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चेन्नई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में संपत्ति विवरण न देने वाले 157 सदस्य, RTI से खुलासा

Kavita2
8 Jun 2026 9:36 AM IST
चेन्नई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में संपत्ति विवरण न देने वाले 157 सदस्य, RTI से खुलासा
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चेन्नई मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन (CMC) के चुनाव समाप्ति के चार साल बाद भी 157 मेयर, डिप्टी मेयर और काउंसिल मेंबर ने अपनी संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया है। यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत सामने आई। इस खुलासे से लोकल बॉडी में पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे पर सवाल उठे हैं।

आम आदमी पार्टी के लीगल विंग के मैनेजर एम. शंकर ने RTI के तहत कॉर्पोरेशन मेंबरों की संपत्ति संबंधी जानकारी मांगी थी। इसके आधार पर कॉर्पोरेशन ने उन्हें उत्तर भेजा और यह खुलासा हुआ कि 157 अधिकारी अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण समय पर प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं।

म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1973 के तहत, लोकल बॉडी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को चुनाव समाप्त होने के 90 दिनों के भीतर अपनी संपत्ति का ब्योरा कॉर्पोरेशन कमिश्नर को जमा करना अनिवार्य है। इसके अलावा, प्रत्येक सदस्य को इसे हर साल 31 मार्च तक अपडेट करना होता है। यह विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिए, ताकि जनता और अन्य निगरानी एजेंसियां इस पर नजर रख सकें।

सूत्रों का कहना है कि इस बार RTI के जरिए यह जानकारी सामने आने के बाद कई लोगों ने प्रशासनिक ढांचे और नियमों के पालन पर चिंता जताई है। पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार रोकने के लिहाज से यह विवरण बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

एम. शंकर ने कहा कि लोकल बॉडी के नेताओं के संपत्ति विवरण की अनुपस्थिति गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करना और सार्वजनिक जानकारी को उपलब्ध कराना न केवल कानूनी दायित्व है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही की भी पहचान है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकल बॉडी चुनावों के बाद संपत्ति का विवरण जमा न करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के अभाव की भी संभावना बढ़ती है। यह मामला चेन्नई मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन में नेताओं की जवाबदेही को लेकर एक गंभीर संकेत है।

सूत्रों ने बताया कि इस मामले में कॉर्पोरेशन प्रशासन और चुनाव आयोग दोनों की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और समय पर फॉलो-अप के बिना यह स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, RTI के माध्यम से यह जानकारी सामने आने से अब जनता और निगरानी संस्थाओं को कार्रवाई के लिए आधार मिलेगा।

इस खुलासे के बाद जनता और मीडिया ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। लोगों का कहना है कि लोकल बॉडी के नेताओं की संपत्ति और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

आगामी समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और उन 157 अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई होती है या नहीं। इस मामले से लोकल बॉडी चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए नए नियम और मॉनिटरिंग तंत्र पर भी ध्यान केंद्रित होगा।

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